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भिलंगना घाटी का पंवाली कांठा बुग्याल - लोकेंद्र दत्त जोशी

01-06-2024 11:50 AM

कुछ दिन तो आओ अपने पहाड़ में ! पोस्ट में अलौकिक चित्र भिलंगना घाटी के, प्रसिद्ध बुग्याल पंवाली काँठा का है, यह बेहद सुंदर मनमोहक स्थल चार धाम पौराणिक पैदल यात्रा मार्ग के–गंगोत्री, बूढ़ाकेदार,–– घुत्तू से केदारनाथ के बीच , "पंवाली कांठा" है, जो हरा भरा और मखमली घास सा दूर दूर तक फैला हुआ है। चार धाम यात्रा के इस पौराणिक पैदल मार्ग के इर्द गिर्द बेलख, महासार ताल, सहस्र ताल, मंज्याडी ताल, हरे राम, हरे कृष्ण धाम,बूढ़ा केदार, ज्वालमुखी, राज राजेश्वरी मन्दिर,हटाकुनी बेलेश्वर् धाम, घुत्तू रघुनाथ मंदिर ,सोमेश्वर महादेव गंगी, खतलिंग एवं रुद्रा देवी साहित अन्य कई अन्य अलौकिक तीर्थ स्थल हैं। जोकि, बारमासी दर्शनीय स्थल है। और अपने विकास की बाट देख रहा है।


पहाड़ के गांधी इंद्रमणी बडोनी के साथ हमारा भी मानना रहा कि, उत्तराखण्ड हिमालयी क्षेत्रों को ही नहीं बल्कि देश के पर्वतीय राज्यों को विकसित कर, सुंदर और बेशकीमती संसाधनों से भरपूर गंगा यमुना के विस्तृत क्षेत्रों को तीर्थाटन की दृष्टि से विकसित किए जाने चहिए।जिससे पर्यावरण सुरक्षा, धार्मिक,साहसिक एवं नैसर्गिक पर्यटन को बढ़ावा देते हुए सामरिक सुरक्षा स्थानीय स्तर से भी और अधिक मज़बूत रहेगी। परिणाम स्वरूप स्थानीय उत्पादको के साथ,स्थानीय स्तर पर

 रोजगार के खुले अवसर पैदा करना भी रहा है। 


 यदि चार धाम क्षेत्र के दाएं बाएं के सुन्दर तीर्थ–स्थलों को विकसित किए गए होते तो आज हरिद्वार में देश विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को रोकने की नौबत न आती! श्रद्धालु बिना भ्रमण एवं चारधामों के दर्शन किए जीवन भर के मलाल के साथ वापस न लौटते ! पर्यटन को तीर्थाटन की थीम पर विकसित होने से, सरकार की इनकम तो होती ही, साथ ही श्रद्धालुओं को "देव भूमि","स्वर्ग भूमि" उत्तराखण्ड के साक्षात दर्शन होते !सरकार के पर्यटन मंत्रालय को इस बात को गंभीरता से लेना होगा!और चार धाम के पौराणिक धार्मिक अन्य स्थलों को विकसित कराने के लिए मजबूती के साथ त्वरत गति से कार्य करने होंगे !


         हमारे यह सुझाव तब तक धरातल पर सम्भव नहीं होंगे जब तक नेतृत्वकारी ताकतें और राज्य भर के अनुभवी अधिकारी वर्ग देहरादून और अन्य तरायी क्षेत्रों का मोह नहीं छोड़ेंगे!फिल हाल क्षेत्र के युवाओं को स्थनीय स्तर पर एक दूसरे क्षेत्रों की यात्राएं जारी रखते हुए यात्रा वृतांत लिखना भी जारी रखना चहिए। चार धाम श्रद्धालुओं की मंगलमय यात्रा की हार्दिक शुभकामनाएं।

                लोकेंद्र जोशी "एडवोकेट"

इंद्रमणी बडोनी कला एवं साहित्य मंच घनसाली  की कलम से 



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