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देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के जनहित में विभिन्न महानुभावों को महत्वपूर्ण विभागीय दायित्व सौंपे हैं। इन दायित्वों के माध्यम से राज्य में जन कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी ल...


घनसाली, टिहरी:-
जहां एक और पहाड़ों में सेवा देने के लिए मैदानी क्षेत्रों के डॉक्टर कतराते हैं वहीं 20 वर्षों से पहाड़ के दूरस्थ क्षेत्र में सेवा दे रहे हैं डॉ श्याम विजय अबतक करवा चुके हैं 40 हजार से ज्यादा महिलाओं के प्रसव ।
अकसर आपने सुना या देखा होगा की मैदानी क्षेत्रों में कार्यरत डॉक्टर पहाड़ का रुख करने या पहाड़ में सेवा देने से कतराते हैं जिससे पहाड़ों के लोगों को उत्तम स्वास्थ्य की व्यवस्था से वंचित हैं जिसके चलते पहाड़ों से लगातार पलायन बढ़ रहा है।
अमूमन पहाड़ी हिस्से में जीवन यापन करने वाले लोग उत्तम स्वास्थ्य व्यवस्था, अच्छी शिक्षा और रोजगार की कमी के चलते पहाड़ से पलायन करने को मजबूर हैं, वहीं 2003 से टिहरी जिले के सीमांत क्षेत्र घनसाली के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पिलखी में सेवा दे डॉक्टर श्याम विजय किसी मिशाल से कम नहीं है डॉक्टर श्याम विजय विषम परिस्थिति में भी पिछले 20 सालों से सीमांत क्षेत्र में कार्यरत हैं वहीं अब तक ओपीडी के अलावा डॉक्टर श्याम विजय 40 हजार से अधिक महिलाओं के कुशल प्रसव भी करवा चुके हैं डॉक्टर श्याम विजय के उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें कई बार उत्तराखंड के अलग अलग मुख्यमंत्री सम्मानित भी कर चुके हैं वहीं तीन बार डॉक्टर श्याम विजय का तबादला राजधानी देहरादून में हो चुका है मगर जनता के आग्रह पर उन्होंने पहाड़ को नही छोड़ा और अभी भी सेवा भाव से पहाड़ के सीमांत क्षेत्र के लोगों की सेवा में लगे हैं वहीं डॉक्टर श्याम विजय बताते हैं कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पिलखी के प्रतिदिन 150 से अधिक ओपीडी के मरीज इलाज के लिए आते हैं और महिलाओं के प्रसव की अगर बात करें तो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पिलखी उत्तराखंड का पहला और भारत वर्ष का फॉर बेड का चौथा रिकार्ड रखने वाला एक मात्र अस्पताल हैं जहां पर अभी भी प्रतिमाह 150 से 200 तक महिलाओं के कुशल प्रसव करवाए जाते हैं।
डॉक्टर श्याम विजय ने उन डॉक्टरों को संदेश दिया है जो पहाड़ों पर सेवा देने के लिए कतराते है उनका कहना है की डॉक्टरों को मरीज के प्रति सेवा भाव होना चाहिए मै पहाड़ के सीमांत क्षेत्र में 20 साल से सेवा दे रहा हूं मुझे पता ही नही चला की कब 20 साल गुजर गए, वहीं कोरोना काल में डॉक्टर श्याम विजय ने अकेले मोर्चा संभालते हुए कंटेंट जॉन को भी संभाला और अपनी ओपीडी सहित महिलाओं के कुशल प्रसव भी करवाए जिसके लिए उत्तराखंड सरकार ने उन्हें सम्मानित भी किया वहीं सबसे बड़ी बात की जहां पहाड़ के बुजुर्ग लोग हिंदी भाषा का उच्चारण कम कर पाते हैं जिन्हें समझना काफी मुश्किल होता है उन मरीजों से डॉक्टर उनकी स्थानीय भाषा गढ़वाली में उनसे बात कर उनकी समस्याओं को समझते और सुनते हैं तो कहीं न कहीं उन डॉक्टरों को डॉक्टर श्याम विजय से सीख लेनी चाहिए जो पहाड़ चढ़कर पहाड़ के लोगो को सेवा देने से कतराते हैं या पहाड़ में सेवा देने के तैयार नही हैं।
देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के जनहित में विभिन्न महानुभावों को महत्वपूर्ण विभागीय दायित्व सौंपे हैं। इन दायित्वों के माध्यम से राज्य में जन कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी ल...