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सिरदर्द से न हो परेशान, यहां मिलेगा उचित समाधान : डॉ शालिनी मिश्रा दौड़ भाग की ज़िंदगी में अक्सर लोगों में सिरदर्द की सबसे अधिक समस्याएं देखने को मिलती है, यहां तक कि आज के दौर में हर तीसरा व्यक्ति सिरदर्द य...


तीर्थ को पर्यटनस्थल न बनाइये- वैष्णो देवी मंदिर में हुए हादसे ने यह सिद्ध कर दिया है की मंदिर,तीर्थस्थान - दर्शन,तपस्या,आध्यात्मिक ऊर्जा की विषय वस्तु हैं न कि पर्यटन के, पिकनिक के,घूमने के,छुट्टी मनाने के स्थान। परंतु आज की सरकारें और जनमानस के लोग इसे शायद समझ नही पा रहे। एक समय था जब लोग बद्रीनाथ - केदारनाथ यह सोच कर जाते थे की स्वर्ग जा रहे हैं क्या पता लौटेंगे या नहीं, यात्रा दुर्गम थी, पहाड़ों की चढ़ाई थी, और इसी से दर्शनार्थी की हिम्मत,श्रद्धा,भक्ति और तपस्या का भी आंकलन हो जाता था की वह देव दर्शन की कितनी चाह रखता है। परंतु आज का समय है अब दुर्गमता सुगमता में बदल चुकी है, धड़धड़ाते हुए वाहन हेलीकॉप्टर सब देवता के मस्तक तक पहुंच जा रहे हैं, वीo आई o पी o कल्चर आ गया है जेब में पैसा है तो आप देवता के कपार तक हेलीकाप्टर से जा सकते हैं। देवता लोग भी सोचते होंगे की हम इतनी दुर्गम जगह पर जाकर बैठे थे की हमे कोई डिस्टर्ब न कर सके लेकिन पहले तो जो आते थे वे श्रद्धा भक्ति ले के आते थे तो मुझे भी उनको आशीर्वाद देने का मन कर ही जाता था, लेकिन आज तो कूल ड्यूड,आस्तिक,नास्तिक सब ऊपर चढ़े आ रहे हैं बस जेब में गांधी जी होना चाहिए। नौकरी की छुट्टी होनी चाहिए।ये आऐंगे होटल में मीट मुर्गा खायेंगे, दारू पियेंगे, फिर बेल बाटम पहन के परम श्रद्धालु बनकर सरपट मुझ तक पहुंचेंगे, फोटो खींचेंगे,वीडियो बनायेगें, खायेंगे पियेंगे मस्ती करेंगे और लौट जायेंगे।
इन बातों को समझना होगा, हमें भी सरकारों को भी। मंदिर के अंदर जहां देवता की मूर्ति,यंत्र,प्रतिमा या लिंग स्थापित होती है उसे गर्भ गृह कहा जाता है,
गर्भगृह में प्रवेश करने,देवता को स्पर्श करने की पहले तो आपमे सामर्थ्य होनी चाहिए, तन और मन, वस्त्र की शुद्धता होनी चाहिए वैसे भी प्राचीन परंपरा के अनुसार विग्रह का स्पर्श नहीं करना चाहिए, आप दर्शन के लिए गए हैं तो नेत्रों से दर्शन करिए,मूर्ति को हृदय में धारण करिए ,यदि कुछ गंध पुष्प धूप दीप लाए हैं तो उसे खुद चढ़ाने की जगह अर्चक से चढ़वाएं, हृदय में देवता को धारण करके वहां से प्रस्थान करना चाहिए, अब आप कभी भी कहीं भी उस विग्रह का जब ध्यान करेंगे तो वह मूर्ति आपके हृदय से होकर नेत्रों तक जाएगी और आपको क्षण मात्र में दर्शन हो जायेगा, बार बार मंदिर जाने की आवश्यकता नहीं होगी।
सिरदर्द से न हो परेशान, यहां मिलेगा उचित समाधान : डॉ शालिनी मिश्रा दौड़ भाग की ज़िंदगी में अक्सर लोगों में सिरदर्द की सबसे अधिक समस्याएं देखने को मिलती है, यहां तक कि आज के दौर में हर तीसरा व्यक्ति सिरदर्द य...